बेनाम सा रिश्ता अपना बेनाम ही रह गया , यही तो चाहते थे न तुम और मैं, कुछ कहानिया अंत तक न ही पहुंचे तो अच्छा हैं ... वक़्त के साथ सब धूमिल हो जाये , धुंधला जाये... न तुम मेरी तरफ उन निगाहो से देखो, न ही मैं तुमसे उन निगाहो की उम्मीद रखूँ ... कभी कही किसी मोड़ पर मिल जाओ तो मुस्कुरा के मिलो बस इतना ही चाहती हु मैं अब। बचपना , लड़कपन या जो कुछ भी था अच्छा था... एहसास था... जो बिना नाम के भी बहुत मायने रखता था... उसकी वही एहमियत बनी रहे इसलिए इसे यही ख़त्म करते हैं ।
Good luck and Good bye... किस्मत ने चाहा , तो फिर मिलेंगे... नए एहसासो के साथ...
Good luck and Good bye... किस्मत ने चाहा , तो फिर मिलेंगे... नए एहसासो के साथ...