Wednesday, 10 January 2018

हां,  हूं मैं बेपरवाह,

ख्वाहिशों को जिम्मेदारी नहीं मानती,
शायद इसलिए, हां हूं मैं बेपरवाह।

अस्त व्यस्त सी चीजें जिंदा होने का एहसास कराती हैं मुझे,
शायद इसलिए, हां हूं मैं बेपरवाह।

चीजों से प्यार नहीं करती, क्योंकि इंसानों का मोह काफ़ी है मेरे लिए,
शायद इसलिए, हां हूं मैं बेपरवाह।

भूल आती हूं समान अपनी मां के घर, क्योंकि यादें समेटना जरुरी है मेरे लिए,
शायद इसलिए, हां हूं मैं बेपरवाह।

काम छोड़ कर गाने नाचने लगती हूं,क्योंकि बचपना प्यारा है मुझे,
शायद इसलिए, हां हूं मैं बेपरवाह।

खो जाती हूं फोन और किताबों में  कहीं, क्योंकि एक अलग दुनिया में खोना पसंद है मुझे,
शायद इसलिए, हां हूं मैं बेपरवाह।
© वीणा

Sunday, 7 January 2018

मैं और तुम

हम एक से हैं पर अलग अलग 
हैं एक ज़मीं और एक फ़लक़ 

तुम book shelf से जमे हुए, मैं अस्त व्यस्त सा बस्ता हूँ ,
तुम बड़े writer के novel से, मैं लघु कथा का हिस्सा हूँ  ,
तुम रामायण महाभारत से , मैं देव कथा का भाग हूँ 
तुम dd news से सधे हुए , मैं एक सनसीखेज किस्सा हूँ 

हम एक से हैं पर अलग अलग 
हैं एक ज़मीं और एक फ़लक़ 

तुम internet पे wikipidea , मैं viral होती पोस्ट हूँ,
तुम syllabus की पूरी book, मैं कुंजी  वाली दोस्त हूँ,
तुम एक मुस्कुराती परिभाषा , मैं ठिठोली वाला example 
तुम party organizer से serious, मैं बेपरवाह सी host हूँ

हम एक से हैं पर अलग अलग 
हैं एक ज़मीं और एक फ़लक़ 

तुम छप्पन भोग का पूरा थाल , मैं चाट पकोड़ी जैसी हूँ ,
तुम अलार्म से सधे हुए , मैं snooz button की सुस्ती हूँ 
तुम भीमसेन के अलाप से , मैं हनी सिंह वाली  rap हूँ 
 तुम school के अनुशासन से , मैं कॉलेज वाली मस्ती हूँ 

मैं और तुम जब मिल जाते तो बन जाते हैं हम 
हम एक से हैं पर अलग अलग 
हैं एक ज़मीं और एक फ़लक़ 

Wednesday, 3 January 2018

एक साल

धरती ने करी सूर्य की परिक्रमा
और पूर्ण किया अपना एक साल।

हमने क्या किया, ना पेड़ काटे, ना लगाएं
बस उपभोग किया, और पूर्ण किया अपना एक साल।

सृष्टि ने कुछ तारे बुने, कुछ तोड़े ,
और पूर्ण किया अपना एक साल।

हमने क्या किया, ना कुछ बिगड़ा ,  ना कुछ बनाया,
बस गुजरा , और पूर्ण किया अपना एक साल।

प्रकृति ने इस वर्ष भी, दिया अपना सर्वस्व,
और पूर्ण किया अपना एक साल।

हमने क्या दिया , ना कुछ दिया बस लिया ,
और पूर्ण किया अपना एक साल।

चलो, इस साल हंसी बांटें, कुछ बनाएं,
प्रकृति को कुछ दें, और कम से कम लें,
ताकि अगले वर्ष हम भी कह सकें,

हां हमने भी सच  में पूर्ण किया एक साल।

वीणा