कविताएँ हैं मेरी इतिहास सी ,
कुछ पुराने एह्सास सी ,
कुछ अनुभवों के राग सी,
कुछ अनधुले से दाग सी ,
कविताएँ हैं मेरी इतिहास सी |
सजाती हूँ जिसे मैं शब्दों से ,
रचाती हूँ जिसे मैं लफ़्जो से ,
कुछ बीते पलों की सुनाती हूँ
कुछ छूटे लम्हो को सजाती हूँ ,
एक छोटा इतिहास बनाती हूँ ,
फिर एक कविता रचाती हूँ
और बस यही दोहराती हूँ,
कविताएँ हैं मेरी इतिहास सी ,
कुछ अनुभवों के राग सी |
दोनों उतरे कलम की स्याही से ,
दोनों तथ्यों से भरे हुए ,
कुछ भावनाओ से ओत प्रोत ,
कुछ अनुभवों से भरे हुए ,
वाह और दाद से परे कहीं ,
कभी पूर्ण कभी अधूरी सी ,
कविताएँ हैं मेरी इतिहास सी ,
कुछ अनुभवों के राग सी |
वीणा
कुछ पुराने एह्सास सी ,
कुछ अनुभवों के राग सी,
कुछ अनधुले से दाग सी ,
कविताएँ हैं मेरी इतिहास सी |
सजाती हूँ जिसे मैं शब्दों से ,
रचाती हूँ जिसे मैं लफ़्जो से ,
कुछ बीते पलों की सुनाती हूँ
कुछ छूटे लम्हो को सजाती हूँ ,
एक छोटा इतिहास बनाती हूँ ,
फिर एक कविता रचाती हूँ
और बस यही दोहराती हूँ,
कविताएँ हैं मेरी इतिहास सी ,
कुछ अनुभवों के राग सी |
दोनों उतरे कलम की स्याही से ,
दोनों तथ्यों से भरे हुए ,
कुछ भावनाओ से ओत प्रोत ,
कुछ अनुभवों से भरे हुए ,
वाह और दाद से परे कहीं ,
कभी पूर्ण कभी अधूरी सी ,
कविताएँ हैं मेरी इतिहास सी ,
कुछ अनुभवों के राग सी |
वीणा