जानती हूँ मैं , कितना बुरा लग रहा हैं तुम्हे। मैं दिल से नहीं चाहती तुम्हे नजर अंदाज करना , पर मजबूर हूँ। अपने आपको बड़ा ही practical सझती हूँ न मैं। पर गलती मेरी नहीं हैं, तुमने ही सिखाया हैं कई बार 'Be practical' , अब तुम खुद ही बुरा मान रहे हो। अंदर ही अंदर मुझे भी बुरा लग रहा हैं, पर मैं कामयाब कोशिश कर लेती हूँ छुपाने की , तुम्हारी तरह नहीं, चीड़ कर, गुस्सा कर के, चेहरे पर दिखा दूँ। कोई समझे या न समझे मैं समझती हूँ , भाव पढ़ लेती हूँ तुम्हारे चेहरे के।
Please ऐसे चेहरा उतार कर मत घूमो और दोस्तों पर ऐसे चीड़ चीड़ और गुस्सा मत करो। मैं जानती हूँ तुम्हे बुरा लग रहा हैं मेरे ऐसे behavior से , समझो न मुझे। कुछ मेरी भी मजबूरिया होंगी जो मैं इस रिश्ते को acceptनहीं कर सकती।अगर तुम भी नहीं समझोगे तो कहा जाउंगी मैं , किसे बतलाऊँगी , ,क्या बतलाऊँगी नाम भी तो नहीं हैं कुछ इस रिश्ते का.