Sunday, 17 December 2017

कविता और इतिहास

कविताएँ हैं मेरी इतिहास सी ,
कुछ पुराने एह्सास सी ,
कुछ अनुभवों के राग सी,
कुछ अनधुले से दाग सी ,

कविताएँ हैं मेरी इतिहास सी  |

सजाती हूँ जिसे मैं शब्दों से ,
रचाती हूँ जिसे मैं लफ़्जो से ,
कुछ बीते पलों की सुनाती  हूँ
कुछ छूटे लम्हो को सजाती हूँ ,
एक छोटा इतिहास बनाती  हूँ ,
फिर एक कविता रचाती  हूँ
और बस यही दोहराती हूँ,

कविताएँ हैं मेरी इतिहास सी ,
कुछ अनुभवों के राग सी | 

दोनों उतरे कलम की स्याही से ,
दोनों तथ्यों से भरे हुए ,
कुछ भावनाओ से ओत प्रोत ,
कुछ अनुभवों से भरे हुए ,
वाह और दाद से परे कहीं ,
कभी पूर्ण कभी अधूरी सी ,

कविताएँ हैं मेरी इतिहास सी ,
कुछ अनुभवों के राग सी |

वीणा 





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