सीता होती जो तेरी मैं, रावण से तुम भीड़ जाते,
मैं कोई नहीं तेरी दाता , जो मुझे बचाने तुम आते।
द्रोपदी सी होती सखा तेरी , तुम चिर हरण रुकवा जाते,
मैं कोई नहीं तेरी मोहन , जो मुझे बचाने तुम आते।
तुझसे नाता जोड़ सकूं मैं, वो उमर ना मैंने पाई थी,
मैं तो जंगल जंगल बस , तेरे पशु चराने आयी थी।
रिश्ता होता मुझसे कुछ, क्या तभी प्रकट तुम हो पाते,
मैं कोई नहीं तेरी दाता, जो मुझे बचाने तुम आते।
घात लागए राक्षस को , मैं तो ना पहचान पाई थी,
पर क्या मुझ जैसी समझ , तुझमें भी समाई थी।
प्रहलाद जो होती मैं तेरी , तुम खंबा तोड़ निकाल आते,
मैं कोई नहीं तेरी दाता, जो मुझे बचाने तुम आते।
नाम लिया खुदा का जो, क्या पर तू नाराज हुआ,
पर तुझे पूजने वाली का भी, मुझ जैसा ही तो हाल हुआ।
बेटा होती जो इब्राहिम का, क्या बली तभी तुम रुकवाते,
मैं कोई नहीं तेरी भी खुदा, जो मुझे बचाने तुम आते।
वीणा
मैं कोई नहीं तेरी दाता , जो मुझे बचाने तुम आते।
द्रोपदी सी होती सखा तेरी , तुम चिर हरण रुकवा जाते,
मैं कोई नहीं तेरी मोहन , जो मुझे बचाने तुम आते।
तुझसे नाता जोड़ सकूं मैं, वो उमर ना मैंने पाई थी,
मैं तो जंगल जंगल बस , तेरे पशु चराने आयी थी।
रिश्ता होता मुझसे कुछ, क्या तभी प्रकट तुम हो पाते,
मैं कोई नहीं तेरी दाता, जो मुझे बचाने तुम आते।
घात लागए राक्षस को , मैं तो ना पहचान पाई थी,
पर क्या मुझ जैसी समझ , तुझमें भी समाई थी।
प्रहलाद जो होती मैं तेरी , तुम खंबा तोड़ निकाल आते,
मैं कोई नहीं तेरी दाता, जो मुझे बचाने तुम आते।
नाम लिया खुदा का जो, क्या पर तू नाराज हुआ,
पर तुझे पूजने वाली का भी, मुझ जैसा ही तो हाल हुआ।
बेटा होती जो इब्राहिम का, क्या बली तभी तुम रुकवाते,
मैं कोई नहीं तेरी भी खुदा, जो मुझे बचाने तुम आते।
वीणा
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