Wednesday, 21 May 2014


When I Can Only Feel Nirosha.....

NIROSHA

एहसास हे तुम्हारा, तुम हो मुझमे कही 
जब छुते हो तुम ख़ुशी होती हे |   
जब हँसते हो तुम कुछ खास  होता हे|
जब दुखी होते हो तुम एहसास होता हे|

सिर्फ एहसास नहीं स्पर्श हो तुम|
जब सोचती हु तुम्हे पास होते हो तुम|
जब देखना चाहू तुम्हे दूर होते हो तुम|
जब छूना चाहू तुम्हे मुझमे ही होते हो तुम|

सिर्फ स्पर्श नहीं, सम्पूर्ण हो तुम |
सबकी आँखों का इंतजार हो तुम|
सबके होठो  की हसी हो तुम|
उन जेसे या मुझ जेसे ,
या हम दोनों जेसे हो तुम|

1 comment:

  1. ये मेरा नसीब है की ये कविता बहोत पहले खुद आपने मुझे सुनाई थी....शायद आपको अभी याद भी नहीं होगा (३१/८/१२) .... पुरानी यादें

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