Sunday, 11 February 2018

खामोशियों की रफ्तार , बहुत तेज होती है।

पहली मुलाक़ात हो तो, दिल छू जाती है,
और आखरी हो तो , दिल चीर जाती है।

पहला प्यार हो तो , एहसास छुपा जाती है,
दूसरा हो तो, कुछ राज़ छुपा जाती है।

खामोशियों की रफ्तार , बहुत तेज होती है।

शाम की ख़ामोशी , रात में तब्दील हो जाती है,
और रातों की, सन्नाटे में  घुल जाती है।

दोस्ती में खामोशी, घाव दे जाती है,
और दुश्मनी में, वार का अंदाज बयां कर जाती है।

खामोशियों की रफ्तार , बहुत तेज, धार दार होती है।

आंखो से  बयां हो तो, इश्क बन जाती हैं,
आंसू से बयां हो तो, ज़फा बन जाती हैं।

कभी दिल को ठंडक दे कर, सुकून बन जाती है,
कभी सांसों में भर कर, चुभन बन जाती हैं।

खामोशियों की रफ्तार , बहुत तेज होती है।


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