Wednesday, 7 March 2018

Women's Day


आज ऑफिस में सब जगह pink balloons लगे थे , सब जगह एक त्यौहार जैसा माहोल था, हो भी क्यों नहीं, आज Women's Day जो हैं ।
आज ऑफिस में  women employees  के लिए games , movies ,  cake cutting , gifts बहुत कुछ था।
Priya ऑफिस आयी , mails check  किये और pantry की ओर निकल ली।
जाते जाते विवेक से बोल गयी , यार क्लाइंट साइड से मेल आये तो message कर देना मैं अंदर आ जाउंगी।
और फिर पूरा दिन टीम की लड़किया बाहर ही रहीं। थोड़ी देर के लिए आती डेस्क टॉप पर एक दो छोटे मोटे काम निपटाती और निकल जाती।  लड़को में थोड़ी जलन की भावना तो थी पर क्या करे आज Women's Day जो है।

शाम के 7 बज रहे थे।  office की लड़कियों के dinner का program  भी था , तो almost सब जा चुकी थीं , या निकल रही थी।  इतने में रवि जो Priya और विवेक का manager था, आया और विवेक से Daily task Details ली।
और निकलते निकलते बोल गया की , अरे Priya को एक पीपीटी complete करना थी, आज तो madam Women's Day मना रही हैं , तुम ही बना देना यार, रात को मुझे Mike को presentation देना हैं , 11 बजे तक।

'अरे यार आज भी 10 बजे तक रुकू मैं , वो भी किसी और के काम के कारण, और वो खुद पार्टी एन्जॉय कर रही है , Women's Day है भाई आज तो , equality का दिन'

और अंदर ही अंदर सोच रहा था , जिन्हे बचपन से equality मिली  हो , क्या उन्हें भी इन सब की जरुरत हैं? या आज भी जो दिन भर मजदूरी करती हैं और जिसका पति उसे मार कर सारे पैसे छीन लेता हैं , या जो बच्चियां पढ़ नहीं पाती , या जो औरतें घरेलु हिंसा की शिकार होती हैं उन्हें ज्यादा जरुरत हैं। साला ये भी हमारे देश के कानून जैसा हो गया है , जिसे फायदा मिलना चाहिए उन्हें मिलता हैं ठेंगा , और जिन्हे इसकी जरुरत नहीं उन्हें मिलता है सारा फुटेज।

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