Tuesday, 11 April 2017

बेनाम सा रिश्ता -2

देखा.....  कहा था ना मैंने हँसोगे तुम...... क्या कह रहे थे? प्यार हो गया हैं मुझे तुमसे ?  चलो जाओ... प्यार होता तो नाम ना दे देती अपने रिश्ते को, बेनाम क्यों पुकारती ? कुछ एहसास भर है ये जिसे न तुम समझ पाओगे ना मैं समझना चाहती हूँ।  रहने देते हैं ना, ऐसा ही एहसास वाला रिश्ता, बिना किसी नाम का , बेनाम सा रिश्ता।  चलो अब मेरे बारे में सोचना छोडो और अपने काम पर ध्यान दो... वरना कही तुम्हे मुझसे प्यार ना हो जाये... जो मैं बिलकुल नहीं चाहती... 

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